माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों की व्यावसायिक चयन में निर्देशन एवं परामर्श की भूमिका
Author(s): मुकेश कुमार, प्रो० निर्भय सिंह
Abstract
सारांश माध्यमिक स्तर शिक्षा का एक ऐसा स्तर है, जहां विद्यार्थी किशोरावस्था में प्रवेश कर चुका होता है | किशोरावस्था को मनोवैज्ञानिको ने तूफान एवं संघर्ष की अवस्था कहा है | किशोर एवं किशोरियों में अनेक शारीरिक , मानसिक, संवेगात्मक परिवर्तन होते हैं , यह अवस्था सबसे जटिल अवस्था मानी जाती है| अतः इस अवस्था में छात्र-छात्राओं का सही प्रकार से मार्गदर्शन आवश्यक है | शिक्षा के द्वारा बालकों को भावी जीवन के लिए तैयार किया जाता है| शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थी विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करते हैं, इन समस्याओं के समाधान के लिए विद्यार्थियों को निर्देशन की आवश्यकता होती है| माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों के सामने पाठ्यक्रम में अनेक प्रकार की विभिन्नताएं पाई जाती हैं, उस समय किशोर किस विषय का चयन करें एवं किस व्यवसायिक पाठ्यक्रम का चयन करें, जिससे कि उनका भविष्य प्रकाशमय हो सके | व्यवसायिक चयन में निर्देशन एवं परामर्श की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है| इस समय विद्यार्थियों की रुचि उनकी योग्यताओं उनकी आंतरिक शक्तियों को एक परामर्शदाता द्वारा समझकर उनको सही मार्गदर्शन दिया जाए तो उनका भविष्य उज्जवल हो सकता है | एवं समाज , राष्ट्र के निर्माण में भी उनका योगदान होगा | वैसे तो निर्देशन एवं मार्गदर्शन शिक्षा के सभी स्तरों पर महत्वपूर्ण है , लेकिन माध्यमिक स्तर पर इसकी महत्ता बहुत अधिक है निर्देशन एवं परामर्श की भूमिका न केवल व्यवसायिक चयन में महत्वपूर्ण है बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है ।
मुख्य शब्द : निर्देशन एवं परामर्श , व्यवसायिक चयन , विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास , माध्यमिक स्तर
Cite this Article:
मुकेश कुमार , प्रो० निर्भय सिंह (2025) माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों की व्यावसायिक चयन में निर्देशन एवं परामर्श की भूमिका”. Chaitanya Samvad Interdisciplinary Journal of Research, 1(3), 32–38.
Doi: https://doi.org/10.65250/chaitanyasamvad.v1i3.4
Journal URL: https://chaitanyasamvad.com/
License
Copyright (c) 2025 Chaitanya Samvad
This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.