स्वामी विवेकानन्द का “आध्यात्मिक राष्ट्रवाद” और समकालीन भारत : एक दार्शनिक –शैक्षिक अध्ययन
Author(s): स्वांति गौर
Abstract
यह शोध-लेख स्वामी विवेकानन्द के “आध्यात्मिक राष्ट्रवाद” (Spiritual Nationalism) की अवधारणा का दार्शनिक, सामाजिक तथा शैक्षिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। लेख का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि विवेकानन्द के राष्ट्रवाद की आधारभूमि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं थी, बल्कि मानव-निर्माण, आत्मिक उत्थान, चरित्र-निर्माण और सार्वभौमिक बंधुत्व थी। उनके विचारों में वेदान्त, मानवतावाद और शिक्षा का समन्वय दिखाई देता है। यह अध्ययन विशेष रूप से इस प्रश्न का परीक्षण करता है कि वर्तमान वैश्वीकरण, नैतिक संकट और सांस्कृतिक विखंडन के दौर में विवेकानन्द की दृष्टि किस प्रकार प्रासंगिक है। अध्ययन में विवेकानन्द के भाषणों, पत्रों और व्याख्यानों का विश्लेषण करते हुए यह निष्कर्ष निकाला गया है कि उनका राष्ट्रवाद सांस्कृतिक आत्मगौरव, सामाजिक समरसता और नैतिक शिक्षा पर आधारित था।
मुख्य शब्द: स्वामी विवेकानन्द, आध्यात्मिक राष्ट्रवाद, वेदान्त, शिक्षा-दर्शन, मानवतावाद, भारतीय संस्कृति
Cite this Article:
स्वांति गौर. (2026). स्वामी विवेकानन्द का “आध्यात्मिक राष्ट्रवाद” और समकालीन भारत : एक दार्शनिक –शैक्षिक अध्ययन. Chaitanya Samvad Interdisciplinary Journal of Research, 2(1), 53–59.
Doi: https://doi.org/10.65250/chaitanyasamvad.v2i1.7
Journal URL: https://chaitanyasamvad.com/
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