Chaitanya Samvad Interdisciplinary Journal of Research

Chaitanya Samvad Interdisciplinary Journal of Research

(An International Open Access, Peer-reviewed & Refereed, Quarterly, Multidisciplinary Online Journal) |  ISSN : 3107-7102 (Online)

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श्रीमद्भगवद्गीता में प्रतिपादित जीवन प्रबंधन

Vol. 02, Issue 01, pp. 30–33 | Published: 30 March 2026

Author(s): डॉ. दीप्ति वाजपेयी

Abstract

वेदों की सारभूत श्रीमद्भगवद्गीता हमारे जीवन की मार्ग-निर्देशिका है। गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का व्यावहारिक मनोविज्ञान है, जो व्यक्ति को संकट की घड़ी में सही निर्णय लेने, आत्म-नियंत्रण बनाए रखने और नैतिकता का पालन करने की प्रेरणा देती है। इसमें प्रतिपादित निष्काम कर्म का सिद्धांत व्यक्ति को परिणाम की चिंता छोड़कर कर्म पर ध्यान केंद्रित करने की शिक्षा देता है, जिससे उसकी कार्यक्षमता और मानसिक संतुलन दोनों बढ़ते हैं। आत्म-नियंत्रण और इन्द्रिय संयम का संदेश आधुनिक Emotional Intelligence और Self-Discipline से मेल खाता है, जो आज के प्रतिस्पर्धी वातावरण में सफलता के लिए अनिवार्य हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता का जीवन प्रबंधन दर्शन आधुनिक समय की चुनौतियों—जैसे तनाव, प्रतिस्पर्धा, नैतिक दुविधाएँ और नेतृत्व की जटिल परिस्थितियाँ—का समाधान प्रस्तुत करता है। इसे एक “आध्यात्मिक प्रबंधन ग्रंथ” माना जा सकता है, जो भारतीय दर्शन को वैश्विक प्रबंधन शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है। गीता का संदेश आज भी उतना ही सार्थक है जितना महाभारत के युद्धक्षेत्र में था, क्योंकि यह मनुष्य को सिखाता है कि वास्तविक सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि कर्म की निष्ठा, आत्म-संयम और धर्म के पालन में निहित है।

मुख्य बिंदु [Keywords] निष्काम कर्म, आत्म-नियंत्रण, नेतृत्व, मार्गदर्शन, निर्णय क्षमता,जीवन प्रबंधन.

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